अरण्ड

  • अरण्ड के विश्व के प्रथम संकर(जीसीएच-3) के विकास में सुविधा प्रदान की|
  • 3481 जननद्रव्य प्रविष्टियों का मूल्यांकन, लक्षण-वर्णन और अनुरक्षण|
  • 165 प्रविष्टियों का प्रथम अरण्ड क्रोड विकसित किया जा चुका है|
  • महत्वपूर्ण कृषि-आर्थिक गुणों से युक्त 13  जननद्रव्य प्रविष्टियों का पीजीआरसी, एनबीपीजीआर, नईदिल्ली में पंजीकरण कराया गया|
  • 2 किस्में और 3 संकर विकसित करके जारी किएगए
  • एग्रोबैक्टीरियम ट्रयूमेफेसियंस मध्यित और अरण्ड के सेमीलूपर कीट के लिए प्रत्यक्ष जीन हस्तांतरण विधियांे के माध्यम से अरण्ड के आनुवंशिक रूपांतरण में सफलता प्राप्त की|
  • बेसिलस थुरेंजिएंसिस के स्थानीय आइसोलेट(DOR Bt-1) से 3.5 kb आकार के नए Cry1 जीन को विलगित करने व क्रमबद्घ करने में सफलता मिली|
  • 10 संकरों के मामले में आनुवंशिक शुद्घता के परीक्षण के लिए आरकेपीडी मार्करों की पहचान की गई|
  • टिकाऊ आधार पर उत्पादकता को सर्वोच्च करने के लिए क्षेत्र विशिष्ट लाभदायक फसल प्रणालियों, खेती की विधियों व पोषक तत्व प्रबंधविधियों को विकसित करके उनकी अनुशंसा की गई
  • लैपिडोप्टेरन नाशक जीवों के नियंत्र्ण के लिए दो जैव-नाशक जीवनाशियों नामत:डीओआर बीटी-1 (नॉक) का विकास किया गया है| इस के साथ ही अरण्ड, अरहर, मिर्च तथा मंूगफली में मृदा वाहित रोग के नियंत्र्ण के लिए ट्राइकोडर्मा विरिडे बी-16 (ट्राइविर) का विकास करके इन दो नाशकजीवनाशियों को केन्द्रीय कीटनाशी मंडल में पंजीकृत कराया गया तथा इनप्रौद्योगिकियों को क्रमश:37 व 2 निजी उद्यमियों को वाणिज्यीकृत किया गया|
  • नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्सियम, मैग्नीशियम, सल्फर, लौह और बोरॉन के लिए कमी के लक्षणों की पहचान की गई|
  • बोट्राइटिस धूसर सड़न और मुर्झान के लिए सरल, विश्वसनीय व त्वरित कृत्रिम छंटाई की तकनी कें विकसित की गईं|
  • 80 प्रतिशत से अधिक के आकर्षक बीज प्रतिस्थापन अनुपात को प्राप्त करने में योगदान दिया| अरण्ड की नई किस्मों और संकरों के बड़े पैमाने पर और तेजी से प्रचार-प्रसार के लिए अरण्ड में बीज ग्राम कार्यक्रम सफलतापूर्वक लागू किया गया| 

सूरजमुखी

  • 1496 जननद्रव्य प्रविष्टियों का मूल्यांकन, लक्षण-वर्णन और अनुरक्षण
  • यूएसडीए, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा इंस्टीट्रयूट ऑफ फील्ड एंड वेजिटेबल क्रॉप्स, यूगोस्लाविया से एकत्रित 41 हेलियंथस प्रजातियों की 570 प्रविष्टियों का अनुरक्षण तथा प्रमुख रोगों व कीटनाशकजीवोंकेसंदर्भमेंउनकालक्षण-वर्णन
  • महत्वपूर्ण कृषि आर्थिक गुणों से युक्त 3 प्रविष्टियों का पीजीआरसी, एनबीपीजीआर, नई दिल्ली में पंजीकरण|
  • 2 किस्मोंव1 संकर का विकास
  • हेलियंथस एग्रोफाइलस से सूरजमुखी में नए नरवंध्य साइटोप्लाज़्म का विकास तथा सूरजमुखी विशिष्ट सरल क्रम पुनरावर्ती मार्कर का उपयोग करके उर्वरता लाने वाले जीव का लक्ष्य निर्धारण|
  • सूरजमुखी के लिए खरीफ में ज्वार और मूंगफली तथा रबी में ज्वार और चना के साथ आदर्श टिकाऊ फसल क्रम की अनुशंसा की गई, ताकि उच्च जैविक उत्पादकता एवं लाभ प्राप्त किए जा सकें|
  • सूरजमुखी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्सियम, मैग्नीशियम, सल्फर, लौह और बोरॉन की कमी के लक्षणों की पहचान|
  • आल्टरनेरिया पत्ती धब्बा (आल्टरनेरिया है लियंथी) रोग के लिए सरल, भरोसेमंद व त्वरित कृत्रिम छंटाई की तकनीकों का विकास|
  • सूरजमुखी के ऊतक क्षय या नेक्रॉसिस रोग के लिए प्रबंध पैकेज की अनुशंसा और इससे पहले वाहक के रूप में थि्रप्स की पहचान|
  • ब्यूवेरिया बेसीनिया के प्रभेद के तरल फार्मुलेशन (30 प्रतिशत निलंबन सांद्र) का विकास तथा उसका लाइसेंस 3 जैव नाशकजीवनाशी उद्यमियों को दिया गया|
  • 90 प्रतिशत से अधिक के आकर्षक बीज प्रतिस्थापन अनुपात को प्राप्त करने में योगदान दिया| 

 

कुसुम

  • 6391 जननद्रव्य प्रविष्टियों का मूल्यांकन, लक्षण-वर्णन और अनुरक्षण
  • एक आनुवंशिक नरवंध्य वंशक्रम का पीजीआरसी, एनबीपीजीआर, नईदिल्ली में पंजीकरण|
  • आल्टरनेरिया पत्तीधब्बा(119), फ्रयूजेरियम मुर्झान(457) और माहुओं (72) की सहिष्णु प्रविष्टियों की पहचान|
  • भारत में कुसुम के प्रथम संकर पर आधारित डीएसएच-129 जो एक जीएमएस है को विकसित करके जारी किया गया|
  • नरवंध्य प्रेरित जीन कैसेट से तंबाकू के पौधे के रूपांतरण के माध्यम से कुसुम में नरवंध्यता के संचार हेतु विषयम युग्मज या fH522 का उपयोग करके इस संकल्पना के प्रमाण का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया|
  • पीटीजीएस वाहकों के उन तीन प्रकारों का विकास जो या तो हेयरपिन आरएनए व एंटिसेंस आरएनए उत्पन्न करते हैं या विषम युग्मज3' अनट्रांसलेटिड रीज़न की साइलेंसिंग (एसएचयूटीआर) में उन्हें लाते हैं ताकि पराजीनी नरवंध्य पौधों में उर्वरता को प्रभावी रूप से पुन:स्थापित किया जास के|
  • कुसुम में नाइट्रोजन व लौह की कमी के लक्षणों की पहचान|
  • फ्रयूजेरियम मुर्झान रोग की सरल, भरोसेमंद व त्वरित कृत्रिम छंटाई तकनीकों का विकास|