आई एस ओ आर-परिचय

   
भारत में नौ वार्षिक तिलहनी फसलें तथा कुछ बहुवर्षीय तैल वृक्ष फसलें उगाई जाती हैं जो देश के विभिन्न कृषि पारिस्थितिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से वितरित है। अनुसंधानकर्ता, विकास एजेंसियां, नीति निर्माता तथा उद्योग देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में गहन प्रयास कर रहे हैं। उनके प्रयासों को सहायता पहुंचाने तथा वैज्ञानिक सूचना व विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए तिलहनों से संबंधित वैज्ञानिक सोसायटी को आरंभ करने की गहन आवश्यकता अनुभव की गई जिसके अंतर्गत तिलहन के क्षेत्र से संबंधित अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास व अन्य संबंधित उत्पादों के विकास में रत् कार्मिकों संगठनों और संस्थाओं को एक साथ लाया जा सके। कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, बंगलुरू ने 1982 में तिलहनी फसलों पर आयोजित अखिल भारतीय समन्वित तिलहन अनुसंधान परियोजना की कार्यशल में तिलहन अनुसंधान कर्ताओं ने एक वैज्ञानिक सोसायटी को गठित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। तद्नुसार इंडियन सोसायटी ऑफ ऑइल सीड रिसर्च (आई एस ओ आर) का गठन हुआ और इसे 14 दिसम्बर 1983 में सोसायटियों के पंजीकार के हैदराबाद स्थित कार्यालय में पंजीकृत कराया गया (पंजीकरण संख्या 2049)। यह पंजीकरण आंध्र प्रदेश (तेलंगाना क्षेत्र), सार्वजनिक सोसाटी पंजीकरण अधिनियम 1350 फास्ली (1350 एफ का अधिनियम I)।
   डॉ ओ.पी. गौतम और डॉ एन.एस. रंधावा, तत्कालीन महानिदेशक, भा.कृ.अ.प. इसके संरक्षक थे तथा पूर्व विशेष महानिदेशक, भा.कृ.अ.प., डॉ एम वी. राव, आई एस ओ आर के अध्यक्ष थे जिनहोंने 1983 से 1990 और 2006 से 2009 तक सोसायटी के क्रियाकलापों का मार्गदर्शन किया। सोसायटी के सम्मानित पूर्व अध्यक्षों ने विभिन्न क्रियाकलापों को निरंतर सहायता पहुंचाकर इस सोसायटी को सशक्त बनाया है, इनमें प्रमुख हैं डॉ. आर.एस. परोदा, डॉ वी.एल चोपड़ा, डॉ. मंगला राय, पूर्व सचिव, डेयर तथा महानिदेशक, भा.कृ.अ.प.; डॉ ई.एस. सिद्दीक और डॉ. जी कल्लू, पूर्व उप महानिदेशक, भा.कृ.अ.प. सोसायटी के वर्तमान अध्यक्ष, तिलहन अनुसंधान निदेशलय के पूर्व परियोजना निदेशक डॉ डी.एम. हेगड़े हैं। 
आई.एस.ओ.आर. ने 1984 से "जर्नल ऑफ ऑइल सीड्स रिसर्च" नामक अर्ध वार्षिक वैज्ञिानक जरनल प्रकाशित करना आरंभ किया। अब यह जरनल नियमित रूप से प्रकाशित हो रहा है और 3.3 रास रेटिंग के साथ इसका व्यापक सर्कुलेशन है। 
अपने स्थापना काल से अब तक सोसायटी का निरंतर विस्तार हुआ है तथा वर्तमान में इसके 1200 से अधिक आजीवन सदस्य तथा 200 वार्षिक सदस्य हैं। सोसायटी नियमित रूप से राष्ट्रीय संगोष्ठियों/सिम्पोजियमों तथा सम्मेलनों का आयोजन करती है।

 

उद्देश्य


• तिलहन अनुसंधान, विकास, तेल प्रौद्योगिकी तथा तिलहनों से जुड़े सम्बद्ध उत्पादों में रत् या उसमें रुचि रखने वाले सभी व्यक्तियों , संगठनों, संस्थाओं को एक साथ लाना। इससे वैज्ञानिक सूचना तथा विचारों के आदान-प्रदान के लिए कार्मिकों को एक मंच उपलब्ध होगा। 
• सोसायटी की सदस्यता से जुड़े नियमों का पालन करके तथा आचार संहिता को अपनाकर तिलहनों तथा सम्बद्ध उत्पादों के क्षेत्र में कार्यरत वैज्ञानिकों व प्रौद्योगिकी विदों की दक्षता व उपयोगिता को बढ़ावा देना ताकि वैज्ञानिक व व्यावसायिक कुशलता के उच्च मानक निर्धारित किए जा सकें। 
• तिलहनों, तेलों व संबंधित उद्योगों के समग्र, आनुपातिक व आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।
• अपने सदस्यों के बीच सूचना व ज्ञान का प्रसार-प्रचार करना तथा तिलहनों व सम्बद्ध उत्पादों पर वैज्ञानिक शिक्षा के लिए कार्यक्रम आयोजित करना।
• सोसायटियों के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए जर्नलों, पत्रों, पुस्तकों व अन्य संबंधित साहित्य को प्रकाशित व परिचालित करना।
• समान उद्देश्यों वाले संबंधित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सम्पर्क स्थापित करना व उसे बनाए रखना।


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इंडियन सोसायटी ऑफ ऑइलसीड्स रिसर्च
तिलहन अनुसंधान निदेशालय
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फैक्स : -91-040-24017969
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वैबसाइट: http://www.isor.co.in

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