बीजग्रामअवधारणा


बीज ग्राम की अवधारणा आंध्रप्रदेश में पहली बार1998-1999 के दौरान तिलहन अनुसंधान निदेशालय की तकनीकी व अन्य वांछित सहायता के साथ लागू की गई थी| अरण्ड की ज्योति(डीसीएच-9) किस्म को 146 किसानों ने 400 एकड़ क्षेत्र में उगाया| इनमें से अधिकांश किसान (90 प्रतिशत) छोटे और सीमांत आदिवासी किसान थे| मौसम की प्रतिकूल स्थितियों के बावजूद कुल 1250 क्विंटल प्रमाणित बीज उत्पन्न किया गया| इस प्रक्रिया में लागत लाभ अनुपात 1:3 था| इस में शामिल अन्य स्टेकहोल्डर थे: विजय वर्धनी ऑयल सीड्रस ग्रोअर फेडरेशन ऑफ आंध्रप्रदेश, संगमेश्वरा ग्रामेणा बैंक तथा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी| सफलता से राज्य के अरण्ड की खेती वाले क्षेत्र में इस किस्म का फैलाव तेजी से हुआ और यह गतिविधि विभिन्न गांवों में जारी रही| निदेशालय अब अपनी प्रजनक बीज उत्पादन इकाई की तकनी की सहायता के अंतर्गत ग्राम स्तर पर भागीदारी में अरण्ड के संकर बीजोत्पादन पर ध्यान दे रहा है जिसके अंतर्गत इकाई द्वारा बीज को वापस खरीदने की व्यवस्था की गई है| संकर बीज की गुणवत्ता उसको श्रेणीकृत किया जाता है और उसको किसानों को उचित मूल्य पर बेचा जाता है|