क्र.सं कृषक/उद्यमी नई खोज सूचना देने वाले
1 श्री शिव विजय सिंह सुजानपुर, घाटमपुर, कानपुर, उत्तर प्रदेश, मोबाइल : 09919809791 अरण्ड + मिर्च/टमाटर, यह स्थानीय की तुलना में बेहतर अंतर फसलन प्रणाली है|   डॉ. एन.डी. सिंह, कानपुर
2 श्री सुरेश कुमार सुपुत्र् श्री फूल चंद शर्मा, हरीपुर, गोलागढ़, भिवानी, हरियाणा  मो. 09812119013 सरसों के स्थान पर अरण्ड की खेती आरंभ की और इस प्रकार सरसों की फसल में खरपतवारों के खतरे से बचकर फसल को होने वाली हानि को कम किया| डॉ. सी.के. यादव, बावल
3 श्री सरजीत सिंह सुपुत्र् श्री नानग राम, रिवासा, महेन्द्रगढ़, हरियाणा मो. 09466721147 बहु फसली गहाई यंत्र या थ्रेशर में सुधार करके इसे अरण्ड की गहाई के लिए इस्तेमाल किया डॉ. सी.के. यादवबावल
4 श्री पटेल, नीलेश कुमार जोइताराम गांव व डाकघर कमाली, उंझा, मेहसाना, गुजरात - 384 140 मो. 9904445690 बीटी कपास के साथ अरण्ड की अंतरफसल से अरण्ड की श्रेष्ठ उपज ली जिससे जनवरी से अप्रैल के दौरान कपास की कम उपज होने से होने वाली क्षति की पूर्ति हो गई अनुसंधान वैज्ञानिक, एस के नगर
5 श्री रेणुका दास पंडितराव देशपाण्डे शिरादासपुर, औंधा, हिंगोली, महाराष्ट्र कुसुम की अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में बुआई करके अपशिष्ट नमी का लाभ उठा रहे हैं तथा फसल क्रम जैसे हल्दी-मूंग/उड़द- कुसुम का उपयोग कर रहे हैं | केंचुए की खाद का उपयोग करके 2200 कि.ग्रा./है. (पीबीएनएस-12 की) तथा 1700 कि.ग्रा./है. (पीबीएनएस 40 की) उपज ले रहे हैं | डॉ. एस.एस. मेहत्रे, प्रजनक, एआईसीआरपी, महाराष्ट्र
6 श्री वाडीलाल प्रभातभाई पोकर ग्राम व डाकघर कनकपुर, अबदासा, कच्छ, गुजरात  मो. 9825568475 अरण्ड के साथ दलहनों की अंतरफसल, रिले फसलन जल संरक्षण की विधियों के साथ-साथ अरण्ड और सूरजमुखी की बीजोत्पादन की तकनीकों का उपयोग डॉ. ए.आर. परमार, कच्छ
7 श्री रामकुमार श्रीचंद प्रजापति, ग्राम व डाकघर गधवाडा वाडी, अबदासा, कच्छ, गुजरात मो. 9879644833 सूरजमुखी और कुसुम के बीजों का उत्पादन डॉ. ए.आर. परमार, कच्छ
8 श्री विनायक भाउ राव साकोजी ग्राम व डाकघर : पनमानगु्रल, अक्कलकोट, सोलापुर (महाराष्ट्र) मो. 0964478470 शीघ्र छिड़काव के लिए चलशील्ड ट्रॉली के साथ एचटीपी पावर स्प्रेयर का उपयोग कर रहे हैं प्रजनक, सोलापुर
9 श्री सुरेश रामचन्द्र करंदीकर ग्राम व डाकघर मंगलबेधा, सोलापुर (महाराष्ट्र) मो. 9881098315 बुआई की विधि - दो कतारों के बाद एक कतार छोड़ देना, 14-28 इंच अंतराल प्रजनक, सोलापुर
10 श्री मालाराम बिश्नोई अनवाना, ओसियन, जोधपुर, राजस्थान मो. 09413956791 डि्रप सिंचाई प्रणाली अपनाकर अरण्ड की 20 से 25 प्रतिशत उच्च उपज ली एस एस सोलंकी, एआरएस - मंदौर
11 श्री महेन्द्र सिंह खिची मनाई, ओसियन, जोधपुर, राजस्थान मो. 09461089907, 09413958263 डि्रप सिंचाई प्रणाली अपनाकर अरण्ड की 20 से 25 प्रतिशत उच्च उपज ली एस एस सोलंकी, एआरएस - मंदौर
12 श्री मुस्तखा मेहताबखा पठान हतरून, बालापुर, अकोला, महाराष्ट्र  मो. 9922043224 सूरजमुखी की प्रति एकड़ 8-10 क्विंटल उपज ली डॉ. एस.एन. देशमुख वरिष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक अकोला
13 श्री निकांथा भास्कर साबले ताकली, निमकारदा, बालापुर, अकोला, महाराष्ट्र मो. 9881834372 सूरजमुखी की प्रति एकड़ 9-10 क्विंटल उपज ली डॉ. एस.एन. देशमुख वरिष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक अकोला
14 श्री किशोर रमेश खोले अगर, अकोला, महाराष्ट्र मो. 9921276828 सूरजमुखी की प्रति एकड़ 8-9 क्विंटल उपज ली डॉ. एस.एन. देशमुख वरिष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक अकोला
15 श्री गोपाल गोवर्धन गेबाद सिरसोली, टेलेहेरा, अकोला, महाराष्ट्र सूरजमुखी की प्रति एकड़ 10-12 क्विंटल उपज ली डॉ. एस.एन. देशमुख वरिष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक अकोला
16 श्री सिंगाडी रामास्वामी सेत्तीपल्ली, अमंगल, महबूबनगर- 509 312 (आंध्र प्रदेश), मो. 094401909585 तिलहन अनुसंधान निदेशालय की किस्मों को अपनाकर 24 क्विंटल/है. तक की सर्वोच्च उपज ले रहे हैं डॉ. एम. पदमैया, प्रधान वैज्ञानिक, तिलहन अनुसंधान निदेशालय
17 श्री बोरावेल्लै विनोद कुमार रेड्रडी, रामापुरम, वाडेपल्ली, महबूबनगर- 509 126 (आं.प्र.) मो. 009440882800 रबी के दौरान सिंचित स्थितियों के अंतर्गत अपने क्षेत्र् में अरण्ड की खेती का प्रसार करने वाले पहले किसान डॉ. एम. पदमैया, प्रधान वैज्ञानिक, तिलहन अनुसंधान निदेशालय
18 श्री मोशा रंगारेड्रडी, कानीमेट्रटा, कोथाकोट्रटा, महबूबनगर- 509 381 (आं. प्रदेश), मो. 0984863080 अपने क्षेत्र् में तिलहन अनुसंधान निदेशालय की अरण्ड उत्पादन प्रौद्योगिकी को लागू किया डॉ. एम. पदमैया, प्रधान वैज्ञानिक, तिलहन अनुसंधान निदेशालय
19 श्री शिव कुमार कुरमागुडा शाहबाद, रंगारेड्डी- 509 222 (आंध्र प्रदेश), मो. 009490014020 सूरजमुखी और कुसुम की तिलहन अनुसंधान निदेशालय की प्रौद्योगिकी को अपनाया डॉ. एम. पदमैया, प्रधान वैज्ञानिक, तिलहन अनुसंधान निदेशालय
20 श्री हरजिंदर सिंह सुपुत्र् श्री गुरदीप सिंह पट्टी नवी बक्श, कपूरथला, पंजाब, मो. 09815836235 विशेष फीतों और ऑडियो कैसेटों का उपयोग करके तथा खेत की मेड़ पर खेत के चारों ओर मक्का उगाकर फसल को पक्षियों से होने वाली क्षति से बचाया डॉ. आर.के. बजाज, वरिष्ठ प्रजनक - सूरजमुखी, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना
21 श्री रंगाराव, सुपुत्र् श्री भीमराव कुलकर्णी आयु: 70 वर्ष, निदगुंडी, रोन, गदग, कर्नाटक, दूरभाष 08381-283225 रबी मौसम  2010 के दौरान इन्होंने बरानी स्थितियों में 50 एकड़ भूमि पर कुसुम की खेती (किस्म ए-2) की और औसतन प्रति एकड़ 5 क्विंटल उत्पादकता ली| उन्होंने अपने पूरी उपज अपने गांव में मेरिको को बेच दी जो एक ग्राम स्तर का खरीद केन्द्र है | एक सक्रिय किसान के रूप में ये विशेष स्थितियों के अंतर्गत बेहतर सस्यविज्ञानी विधि अपनाते हुए सूरजमुखी की उत्पादकता बढ़ाने में संदेश फैला रहे हैं | इन्होंने अपने आस-पास के किसानों को बुआई के लिए देने हेतु सीमित मात्र में बीज उत्पन्न किया है | यह बीज इन्होंने अपनी जमीन पर प्रत्येक वर्ष प्रमाणित बीज का उपयोग करते हुए उगाया है | श्री संतोष कुमार जी.एच. एक्जीक्यूटिव- मैरिको लिमिटेड गुल्बर्गा, कर्नाटक
22 श्री वीरा रेड्डी आयु : 55, मार्कुन्डा, उमानाबाद बिदार, कर्नाटक, मो. 09481411804 रबी 2010 मौसम के दौरान इन्होंने अपने दो एकड़ भूमि पर सिंचित स्थितियों के अंतर्गत पछेती बुआई की तथा प्रति एकड़ 8 क्विंटल की उत्पादकता ली | मैरिको विस्तार टीम के परामर्श व मार्गदर्शन के अनुसार इन्होंने कुसुम की फसल के लिए सिंचाई की एकांतरिक कतार वाली विधि को अपनाया जिससे पानी की कमी की स्थिति से निपटा जा सका | श्री संतोष कुमार जी.एच. एक्जीक्यूटिव- मैरिको लिमिटेड गुल्बर्गा, कर्नाटक