1-   फार्म

वांछितस्थितियोंकेअंतर्गतसूरजमुखी, कुसुम और अरण्ड के विभिन्न क्षेत्रें में सटीक खेत प्रयोग करने और वांछित पृथक्करण व फसल चक्र अपनाते हुए किस्मों, संकरों व जनकों का बीजोत्पादन करने के लिए तिलहन अनुसंधान निदेशालय में फार्म की पूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हैंं| तिलहन अनुसंधा ननिदेशालय के एल्फीसॉल मिटि्रटयों के लिए राजेन्द्रनगर और नारखोदा में दो अनुसंधान फार्म तथा वर्टिसॉल मिटि्रटयों के लिए इक्रीसैट फार्म को मिलाकर कुल तीन अनुसंधान फार्म हैंं| प्रत्येक अनुसंधान फार्म पर मौजूद अनुसंधान सुविधाओं का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:

 
1)      राजेन्द्रनगरफार्म

इस फार्म का कुल क्षेत्र् 14.5 हैक्टर है जिसमें से 4 हैक्टर में सिंचाई का प्रावधान है| इस फार्म में मुख्य कार्यालय भवन, एनेक्सी भवन, प्रयोगशालाएं और छात्रवास, शीत भंडारण इकाई जेनरेटर शैड, कांच तथा स्क्रीनगृह, पराजीनी ग्रीन हाउस, फार्म भंडार भवन, फार्म यंत्रें की कार्यशाला हैं| फार्म में अरण्ड और कुुसुम के लिए मुरझान रोग के प्लॉट भी हैं तथा लाइसीमीटर, बीज उत्पादन व भंडारण इकाई तथा गहाई और सुखाई के लिए खुले यार्ड हैं| पूरे फार्म को 0.25 हैक्टर के प्लाटों में बांटा गया है और यहां तक काले तारकोल की सड़क से पहुंचा जा सकता है| सिंचाई के लिए यहां भूमिगत सिंचाई पाई पलाइन प्रणाली के साथ-साथ जल निकासी का प्रावधान भी मौजूद है| पूरी सीमा पर ऊंची दीवार के साथ-साथ कांटेदार तारों की बाढ़ भी मौजूद है| फार्म में टीएसएल(34), सहायीकर्मी(9) तकनीकी कर्मी(2), कार्यशालाकर्मी/वाहन चालक/ नल साज/इलेक्ट्रीशियन(4) कर्मचारी हैं और इसका सकल पर्यवेक्षण अध्यक्ष(एफओएम) के अधीन है|

2. नारखोदाफार्म

इस फार्म को 1988 के दौरान अधिगृहीत किया गया था और इसमें विशेष प्रकार की चालका मिट्टी(एल्फीसॉल) वाला कुल44 हैक्टर क्षेत्र है। फार्म के 8 हैक्टर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मौजूद है। इस फार्म में कार्यालय भवन, जेनरेटर, प्राथमिक और गौण जुताई के लिए फार्म यंत्र, बहु फसली गहाई यंत्र, बिजली से चलने वाला पछोरने का यंत्र तथा विशाल गहाई यार्ड हैं। फार्म में मौसम विज्ञानी केन्द्र, स्वचालित मौसम केन्द्र, वैज्ञानिककक्ष, पशुबाड़े, औजारों के लिए शैड, मजदूरों के लिए शैड, ट्रैक्टर शैड, बीज प्रसंस्करण इकाई आदि हैं।यहां प्रजनन, सस्यविज्ञान, कार्यिकी विषयों पर खेत अभि मुख अनुसंधानों के साथ सूरजमुखी और अरण्ड का बीजोत्पादन भी किया जाता है।दो जोड़ी बैलों से खेतों में फसल संबंधी विभिन्न कार्य लिए जाते हैं। पूरा फार्म 0.25 हैक्टर के प्लाटों में बांटा गया है और यहां तारकोल की काली सड़क से पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा यहां भूमिगत सिंचाई पाईप लाइन प्रणाली, जलनिकासी का प्रावधान आदि हैं।प्रत्येक फार्म के चारों ओर लोहे के तारों की बाड़मौजूद है।पक्के तालाब में वर्षा का पानी एकत्र करके उसे सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जाता है। फार्म में टीएसएल(64), सहायीकर्मी(2), तकनीकीकर्मी(2), कार्यशाला कर्मी/ वाहन चालक/नल साज(3) कार्यरत हैं और यह अध्यक्ष(एफओएम) के सकल पर्यवेक्षण के अधीन है।

3. इक्रीसैटफार्म

इक्रीसैट फार्म को 2001 में वर्टिसॉल मिट्टियों में कुसुम पर विशिष्ट खेत अनुसंधान के लिए अधिगृहीत किया गया था।इस फार्म का कुल क्षेत्र 16.2 हैक्टर है जिसमें सुनियोजित खेतों के साथ फसल कटाई के पश्चात् उसकी गहाई, सुखाई और भंडारण की सुविधाएं इक्रीसैट द्वारा उपलब्ध कराई गई हैं।फार्म पर सिंचाई सुविधा एंव सिंचाई पाईप लाइनों का नेटवर्क विकसित किया गया है।वर्टिसॉल की कुसुम तथा सूरजमुखी फसलों के लिए विशिष्ट आवश्यकताओं के अलावा फार्म का उपयोग बीजोत्पादन के लिए किया जा रहा है और यह प़थक्करण आवश्यकताओं को भी पूरा करता है।वांछित श्रमिक इक्रीसैट से किराए पर लिए जाते हैं और यहां का प्रबंध दो तकनी की कर्मियों व एक सहायी फार्म स्टाफ द्वारा किया जाता है जबकि सकल पर्यवेक्षण अध्यक्ष(एफओएम) के अधीन है।